वक्त की अहमियत और उसकी क़ीमत
वक्त एक अज़ीम नेमत है जो हमें अल्लाह तआला की तरफ से मिली है। अगर हम इस नेमत की क़ीमत नहीं समझेंगे, तो बाद में केवल पछतावा ही हाथ लगेगा। समय, एक ऐसी चीज़ है जो किसी कीमत पर वापस नहीं आती। इसीलिए, वक्त की अहमियत को समझना और उसका सही इस्तेमाल करना हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। अगर हम अपना वक्त सही तरीके से खर्च नहीं करते, तो हम अपनी ज़िंदगी के अनमोल लम्हे गंवा देते हैं। दोस्तों आप इस तहरीर में मोबाइल का इस्तेमाल और वक़्त एक अज़ीम नेमत है के बारे में पढेंगे।
वक़्त अज़ीम नेमत है
वक्त अल्लाह तआला की अज़ीम नेमतों में से एक नेमत है अगर हमने इस अज़ीम नेमत की कदर नहीं की तो हसरतो निदामत के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा, इसीलिए हमारे लिए ज़रूरी है कि हम वक्त की अहमियत को समझें क्योंकि अगर यह ज़ाए हो गया तो दोबारा नहीं मिल सकता जबकि इसके अलावा अगर दौलत शोहरत हुकूमत ज़ाए हो गई तो दोबारा मिल सकती है, हदीस शरीफ में है के रोज़ाना सुबह जब सूरज तुलुअ होता है तो उस वक्त यह ऐलान करता है कि अगर आज कोई काम करना है तो कर लो कि आज के बाद में पलट कर नहीं आऊंगा (शुअबुल ईमान)
एक दूसरी हदीस में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यूं इरशाद फरमाया, दो नेमतें ऐसी हैं कि जिनके बारे में बहुत से लोग धोखे में हैं, सेहत और फरागत (बुखारी)
वक़्त अच्छा हो या बुरा गुज़र ही जाएगा
वक़्त इंसान का ऐसा सरमाया है जिसका दुरुस्त इस्तेमाल इंसान को बुलंदी पर पहुंचा सकता है, जबकि गलत इस्तेमाल से नुकसान के अलावा कोई चारा नहीं, वक्त की खूबियों में से एक खूबी यह भी है कि वक्त चाहे अच्छा हो या चाहे बुरा गुज़र ही जाता है, हज़रत इमाम शाफ़ई रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं, मैंने सूफिया ए किराम से दो बातों का इल्म सीखा, एक यह के वक्त तलवार है, अगर तुमने उसे काट लिया तो काट लिया, वरना वह तुम्हें काट देगा, दूसरी बात यह के ज़िंदगी बर्फ की तरह है (मदारिजुस सालेकीन) यानी वक्त एक तलवार की तरह है, अगर तुमने उसका सही इस्तेमाल नहीं किया तो, वह तुम्हें बुरे कामों में मसरूफ कर देगा, इसी तरह ज़िन्दगी बर्फ की तरह है जिस तरह से बर्फ धीरे-धीरे पिघलती रहती है, अगर बर्फ बेचने वाला बर्फ पिघलने से पहले रकम कमा ले तो कामयाब है, वरना वह पिघल ही जाएगी, इसी तरह से अगर ज़िन्दगी के लम्हात का सही इस्तेमाल नहीं किया तो, वह हमारा इंतज़ार नहीं करेंगे वह तो गुज़र ही जाएंगे, और वक्त गुज़र जाने के बाद कभी वापस नहीं आता, फिर सिवाए पछतावे के कुछ हाथ ना आएगा, और अल्लाह तआला की बारगाह में ज़िन्दगी की एक-एक सांस का हिसाब व किताब देना है, और हमारे आमाल के हिसाब से तो हमारा ठिकाना जहन्नम ही है।
क़ीमती वक़्त की क़दर करें
इसीलिए हमें और आपको चाहिए कि अपने औकात ज़ाए होने से बचाएं हम क्या कर रहे हैं कहां जा रहे हैं अपना क्रीमती खज़ाना यानी वक्त हम कहां और कैसे गुज़ार रहे हैं इसकी हमें पूरी खबर होनी चाहिए, क्योंकि वक्त गुज़र जाने के बाद दोबारा वापस नहीं आता, अकलमंद इंसान वही है जो वक्त को ज़ाए न होने दे, वक़्त को खराब करने वाली बहुत सी चीज़ें हैं जिसमें मुब्तिला होकर बहुत से लोग अपना वक़्त बर्बाद कर रहे हैं, पुराने ज़माने मैं लोग लहव व लअब में अपना वक़्त बर्बाद किया करते थे, ताश के पत्तों, शराब नोशी, और अय्याशी में अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर देते थे।
मोबाइल सबसे ज़्यादा वक़्त बर्बाद कर रहा है
असरे जदीद में इन तमाम खुराफात से दूर रहकर भी अपना सारा वक़्त मोबाइल फ़ोन में बर्बाद कर रहे हैं, वक़्त ज़ाए करने वाली चीज़ों में से सबसे ज़्याट मोबाइल फोन वक़्त बर्बाद कर रहा है, यह एक ऐसा मुजरिम है जो न जाने कितने रिश्ते, लोगों से मुलाकातें, माँ बाप की मुहब्बत, भाई बहन का प्यार, तलबा का कुव्वते हाफिज़ा, असातज़ा का ज़ौके मुताला, लोगों की आँखों की रौशनी, अच्छी सेहत, इसके अलावा बहुत सी क़ीमती चीजें खा गया, तलबा और नो उम्र नौजवानों के लिए सबसे क़ीमती चीज़ उनका मौजूदा वक़्त है।
मोबाइल दीन से दूरी का ज़रिया
मोबाइल फ़ोन दीन से दूरी का भी एक ज़रिया है, लोग इस क़दर मोबाइल फ़ोन चलाने में मसरूफ रहते हैं के सौमो सलात को भी भूल जाते हैं, इसके अलावा बहुत सारे लोग चलते फिरते खाते पीते गाडी पर चलते अल मुख्तसर हर वक़्त मोबाइल चलाते हैं, आजकल युटुब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, पर शॉर्ट वीडियोज़ की कसरत है जिस में बच्चे और नौजवान अपना वक़्त बर्बाद करते नज़र आते हैं, हालांके यह सुनहरा वक़्त उन्हें अपने कामों में मशगूल रखना चाहिए, मोबाइल ज़रुरत की एक चीज़ है इसको ज़रुरत के लिहाज़ से इसका इस्तेमाल करना चाहिए, गैर ज़रूरी इस्तेमाल से बे शुमार नुक्सानात का सामना करना पड़ता है
छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल
बच्चों को बचपन ही से मोबाइल की आदत डलवा दी जाती है घर में बच्चा रोता है तो वालदैन उसको चुप कराने के लि सके आगे मोबाइल रख देते हैं धीरे धीरे बच्चे को मोबाइल की आदत ऐसी पड़ जाती है के फिर वह मोबाइल न मिलने पर रोना शुरू कर देता है ऐसे बच्चे आगे चलकर कम नज़री और कम अकली का शिकार हो जाते हैं मोबाइल फ़ोन के कसरते इस्तेमाल की वजह से बच्चे के अन्दर से पढ़ने और समझने का मादा ख़त्म हो जाता है, जो दिमाग उनको पढ़ने लिखने में लगाना चाहिए वह गेम खेलने वीडियोज़ देखने में लगा देते हैं।
हमारे लिए करने वाला काम
लिहाज़ा हमारे लिए ज़रूरी है के बच्चों को मोबाइल से बहुत दूर रखें, आप उनके लिए ऐसी चीज़ों का इंतज़ाम करें, जिससे बच्चे को फाएदा हो खेलने कूदने का मौक़ा दें ताके सेहत मंद रहे, पढ़ने लिखने पर बचपन ही से ज़ोर दें ताके आगे चलकर दुश्वारी का सामना न करना पड़े, इसके अलावा बचपन ही से नमाज़ों का आदि बनाएं, अपने साथ मसजिद ले जाएं, और वालदैन को चाहिए के बच्चों के सामने कोई ऐसा काम न करें जिससे बच्चों के बिगड़ने का अंदेशा हो, हमेशा अच्छी बातें करें, नेक काम करें ताके आपको देखकर आपका बच्चा भी वही काम करने की कोशिश करे,
अल्लाह तआला हम सबको मोबाइल का सही इस्तेमाल करने की तौफीक अता फरमाए, बुरी आदतों और बुरी खस्लतों से महफूज़ रखे, आमीन।
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