संगत का असर दुनिया और आखिरत में
अलहम्दुलिल्लाह, नह्मदुहू व नस्तईनुहू व नस्तग्रफिरुहू, व नऊजु बिल्लाहि मिं शरूरी अफुसिना व मिं सय्यिआति अअमालिना। में यद्दिहिल्लाहु फला मुदिल्ला लहू, व में युद्धिल फला हादिया लहू।
अम्मा बअद!
दोस्तों: कहा जाता है कि इंसान का चेहरा आईना दिखाता है और उस की सोहबत उस का बातिन। दोस्त सिर्फ़ साथ नहीं देते बल्कि रास्ते भी चुनते हैं। आज मैं एक निहायत अहम और ज़िन्दगी बदल देने वाले मौजू पर बात करने जा रहा हूँ, और वो है 'रफाक़त का असर'।
कुरआनी आयत
अल्लाह तआला सूरह अल-कहफ़ में फ़रमाता है
वस्बिर नफ़सका मअल्लज़ीना यदऊना रब्बहुम बिलग्रदाति वलअशिय्यि युरीदूना वज्हहू
(अल-कहफ़ 28)
तरजुमा
और अपनी जान उन से मानूस रखो जो सुबह व शाम अपने रब को पुकारते हैं और उस की रज़ा चाहते हैं।
मौज़ू की वज़ाहत
दोस्तोंः इंसान समाज का एक फर्द है, उसे दोस्तों की ज़रुरत रहती है। लेकिन यही दोस्त और रफाक़त इंसान की ज़िन्दगी को संवार भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं। इसी लिए नबी करीम सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया आदमी अपने दोस्त के दीन पर होता है, लिहाज़ा देखो किसे दोस्त बनाते हो (अबू दाऊद)।
यानी इंसान का किरदार, दीन और आदात उसके दोस्तों का आईना बन जाती हैं।
हज़रत अली रज़ीअल्लाहु अन्हु का क़ौल
इसी हक़ीक़त की वज़ाहत करते हुए हज़रत अली रज़ीअल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया बदकारों की सोहबत से बचो, क्यूंकि बुरी सोहबत नेकी को भी मिटा देती है, जैसे आग लकड़ी को जला देती है।
नेक और बद सोहबत का असर
दोस्तोंः नेक सोहबत, ईमान और अमल की रौशनी है जबकि बुरी सोहबत दिल में गुनाहों की सियाही भर देती है। नेक दोस्त इंसान को अल्लाह के क़रीब करते हैं और बुरे दोस्त इंसान को गुमराही की वादियों में धकेल देते हैं।
हिकायत
एक नौजवान एक बुजुर्ग के पास आया और कहने लगा, हज़रत! मैं नेक बनना चाहता हूँ लेकिन मेरा दिल नेकी की तरफ़ माइल नहीं होता।
बुजुर्ग ने नरमी से पूछा, बेटे! तुम किन लोगों के साथ उठते बैठते हो?
नौजवान ने जवाब दिया, मैं बुरे लोगों की सोहबत में रहता हूँ।
बुजुर्ग ने फरमाया, बेटा! अगर तुम खारज़ार में बैठोगे तो कांटे ही चुभेगे। जाओ, नेक लोगों की सोहबत इख़्तियार करो!
चंद ही दिनों बाद, नेक सोहबत के असर से उस नौजवान का दिल नेकीयों की तरफ़ माइल हो गया।
हदीस से मिसाल
नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस बात को एक निहायत खूबसूरत मिसाल से बयान फ़रमाया
नेक और बद सोहबत वाले की मिसाल ऐसी है जैसे खुशबू बेचने वाला और लुहार की भट्टी वाला। ख़ुशबू बेचने वाला या तो तुम्हें ख़ुशबू देगा या तुम उस से ख़ुशबू हासिल करोगे, और लुहार या तो तुम्हारे
कपड़े जला देगा या तुम उस से बदबू पाओगे। (बुखारी व मुस्लिम)
नतीजा
दोस्तों: इंसान की दोस्ती और रफाक़त उस की ज़िन्दगी का रास्ता तय करती है। नेक दोस्त और सालेह रफाक़त इंसान को दुनिया व आख़िरत में कामयाबी से हमकिनार करती है, और बुरी सोहबत इंसान
को दोनों जहाँ में नुकसान पहुंचाती है।
पस, अपने दोस्तों के इन्तेख़ाब में होशियार रहो, क्यूंकि
सोहबत का असर लाज़िमी होता है, चाहे वो ख़ुशबू हो या बदबू।
आखिर में दुआ करते हैं
तरजुमाः ऐ अल्लाह! हमें नेक लोगों की सोहबत नसीब फरमा, हमें अपने सालेह बंदों में शामिल फरमा और हमें बुरे लोगों की सोहबत से महफूज़ फरमा। आमीन!
इख्तितामी जुम्ला
बस आखिर में यही कहूँगा कि दोस्त और सोहबत ही वो कश्तियाँ हैं जो हमें या जन्नत में पहुंचा देंगी या गुमराही के भंवर में फेंक देंगी। अच्छा दोस्त अच्छी सोहबत जन्नत में जाने का ज़रिया बन सकती हैं और
बुरा दोस्त बुरी सोहबत गुमराही के दलदल में डाल देंगी, फैसला आपके हाथ में है!
वमा अलैना इल्लल बलाग।
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