एक गोह का ईमान अफ़रोज़ वाक़िया
यह वाक़िया नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सामने एक एराबी के साथ पेश आया, जिसने आपकी नुबूव्वत को मानने से इनकार कर दिया और यहां तक कह दिया कि वह उस वक़्त तक ईमान नहीं लाएगा जब तक कि गोह आपकी नुबूव्वत की गवाही न दे। अल्लाह के हुक्म से वह गोह साफ़ अरबी ज़ुबान में बोली और अल्लाह की तौहीद और रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की रिसालत की खुली गवाही दी।
यह हक़ीक़त देखकर वह एराबी न सिर्फ़ ख़ुद इस्लाम क़ुबूल कर लिया, बल्कि उसकी पूरी क़ौम के एक हज़ार लोग भी मुसलमान हो गए। पढ़ें एक इमान को मज़बूत करने वाला वाकिया। इस्लामी तारीख़ का अजीब मुअज्ज़ा: गोह का ईमान लाना और एक एराबी की हिदायत पाना।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम और सहाबा किराम रज़ी अल्लाह अन्हुम की महफ़िल
हज़रत-अब्दुल्लाह बिन उमर रदी अल्लाह अन्हु अपने वालिद से रिवा-यत करते हैं कि एक बार नबी अकरम अलैहिस्सलातु वस्सलाम सहाबा किराम रिज़वानुल्लाहि अलैहिम अजमईन के साथ किसी महफ़िल में बैठे थे। इतने में बनी सुलैम का एक एराबी आ गया, उसने गोह पकड़ रखी थी और उसे अपनी आस्तीन में डाल रखा था ताकि उसे अपनी क़यामगाह में ले जाकर खाए। वह कहने लगा, यह लोग किस के गिर्द जमा हैं? सहाबा किराम रज़वानुल्लाह अलैहिम अजमईन ने कहा, इसके गिर्द जिसने दावा-ए-नुबुव्वत किया है। तो वह लोगों के दरमियान से गुज़रता हुआ नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम के करीब चला आया और कहा, ऐ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम), किसी औरत का बेटा तुमसे बढ़कर झूठा और मुझे नापसंद नहीं होगा, अगर यह न होता कि तुम मुझे जल्दबाज़ कहोगे तो मैं तुम पर तेज़ी से हमला करके तुम्हें क़त्ल कर देता और तुम्हारे क़त्ल से सब लोगों के लिए ख़ुशी का सामान पैदा कर देता।
हज़रत उमर रज़ी अल्लाह अन्हु का गुस्सा और नबी करीम का हिकमत भरा जवाब
उमर बिन ख़त्ताब रज़ी अल्लाह अन्हु ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, इजाज़त दें कि मैं इसका सर उड़ा दूं। नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फ़रमाया, ऐ उमर! तुम जानते नहीं कि हलीम व बुर्दबार आदमी ही मर्तबा नुबुव्वत के लायक़ होता है। (तुम्हें बूर्दबारी करनी चाहिए।) फिर वह एराबी नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम की तरफ़ मुतवज्जह होकर कहने लगा, मुझे लात व उज़्ज़ा की क़सम, मैं तुम पर ईमान नहीं रखता। आप अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने उसे फ़रमाया, ऐ एराबी, तुम क्यों ईमान नहीं रखते? किस सबब से तुमने यह बातें कहीं और मेरी महफ़िल की तक़रीम को बालाए ताक़ रखकर नाहक़ गुफ़्तगू की? वह कहने लगा, (हाँ) मेरी गुफ़्तगू अल्लाह-के-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शान के ख़िलाफ़ थी और मुझे लात व उज़्ज़ा की क़सम, मैं आप अलैहिस्सलातु वस्सलाम पर तब तक ईमान नहीं लाऊंगा, जब तक यह गोह आप पर ईमान नहीं लाती। साथ ही उसने आस्तीन से गोह निकालकर नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम के सामने फेंक दिया और कहा, अगर यह गोह इज़हार-ए-ईमान कर दे तो मैं भी दाख़िल-ए-इस्लाम हो जाऊंगा।
गोह का नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम की नुबुव्वत की गवाही देना।
नबी अकरम अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फ़रमाया, ऐ गोह! तो गोह ने साफ़ अरबी ज़बान में, जिसे सब लोग समझ रहे थे, यह कहा, लबैक व सअदैक, या रसूल रब्बिल आलमीन, ऐ परवरदिगार-ए-आलम के रसूल, मैं हाज़िर हूं, मैं हाज़िर हूं।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने उसे फ़रमाया, ऐ गोह, तू किस की इबादत करती है? कहने लगी, मैं उस ख़ुदा की इबादत करती हूं, जिसका आसमान में अर्श है, ज़मीन में क़ब्ज़ा है, समंदर पर हुकूमत है, जन्नत में रहमत है और दोज़ख़ में उसका अज़ाब है। आप ने फ़रमाया, मैं कौन हूं? गोह कहने लगी, आप रसूल रब्बिल आलमीन और ख़ातमुल मुरसलीन हैं। आप की तस्दीक़ करने वाला कामयाब है और इन्कार करने वाला नाकाम व नामुराद।
एराबी का इस्लाम क़ुबूल करना और नबी करीम से उसकी मुहब्बत
एराबी यह देखकर बोल उठा, अश्हदु अल ला इलाहा इल्लल्लाह व अश्हदु अन्नका रसूलुल्लाह हक़्क़न। मैं गवाही-देता हूं कि अल्लाह-के सिवा कोई माबूद-नहीं और आप अल्लाह के रसूल बरहक़ हैं। क़सम बख़ुदा, जब मैं आया था तो रूए ज़मीन पर कोई शख़्स मुझे आपसे ज़्यादा नापसंद न था और बख़ुदा, इस वक़्त आप मुझे अपनी जान और औलाद से भी ज़्यादा अज़ीज़ हैं। मेरे जिस्म का बाल बाल और रोंगटा रोंगटा आप पर ईमान ला चुका है और मेरा ज़ाहिर व बातिन आप पर क़ुर्बान हो चुका है। नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फ़रमाया, उस, अल्लाह के लिए हर तारीफ़ है, जिसने तुझे इस दीन की तरफ़ हिदायत दी है, जो ग़ालिब रहेगा, मग़्लूबियत से ना आशना है। इस दीन को अल्लाह तआला सिर्फ़ नमाज़ से क़ुबूल करता है और नमाज़ क़ुरान के पढ़ने से क़ुबूल होती है।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम का एराबी को सूरह फ़ातिहा और इख़्लास सिखाना
फिर आप ने उसे सूरह फ़ातिहा और इख़्लास सिखलाईं। वह अरज़ करने लगा, या रसूलल्लाह, मैं ने नस्र और नज़्म में कोई भी कलाम इससे हसीन तर नहीं सुना। आप ने फ़रमाया, यह रब्बुल आलमीन का कलाम है, शेर नहीं। जब तुम ने क़ुल हुवल्लाहु अहद (सूरह इख़्लास) को पढ़ लिया तो समझो एक तिहाई क़ुरान पढ़ने का सवाब मिल गया। अगर इसे दो मर्तबा पढ़ा तो तुम ने दो तिहाई क़ुरान की तिलावत का अज्र पाया और इसे तीन बार पढ़ने से तुम्हें पूरे क़ुरान की तिलावत का मक़ाम हासिल हो गया। एराबी कहने लगा, हमारा ख़ुदा कितना अच्छा ख़ुदा है, जो थोड़ा सा अमल भी क़ुबूल करलेता है और बहुत सा अज्र अता फ़रमा देता है।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम की इनायत और एराबी के लिए दौलत और बख्शीश
फिर नबी अकरम अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने सहाबा किराम रज़ी अल्लाह अन्हुम से फ़रमाया, इस एराबी की कुछ मदद करो। तो उन्होंने उसे इतना दिया कि उसे (कसरत-ए-माल की वजह से) दर्जा-ए-तकब्बुर तक पहुंचा दिया। (मतलब यह नहीं कि वाक़ई वह माल लेकर मुतकब्बिर हो गया, मतलब यह है कि उसे इतना माल दिया गया, जिसे लोग अचानक हासिल करके मुतकब्बिर हो जाया करते हैं।)
अब्दुर्रहमान बिन औफ़ रज़ी अल्लाह अन्हु का ऊंटनी देकर मदद करना और आपके लिए बशारत
अब्दुर्रहमान बिन औफ़ खड़े हुए और अर्ज़ करने लगे, या रसूलल्लाह! मेरा ख़्याल है, मैं इसे अपनी ऊंटनी देकर क़ुरबत-ए-इलाही का एक ज़रिया हासिल करूं। मेरी ऊंटनी फ़ारसी नस्ल से छोटी और अरबी ऊंटों से बड़ी है। दस महीने की हामिला है और इतनी शाहज़ोर है कि पीछे से दौड़कर पहले से गुज़रे हुए ऊंटों से जा मिलती है, मगर कोई ऊंट इससे नहीं मिल सकता। मुझे बतौर हदिया कहीं से मिली थी।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फ़रमाया, जो ऊंट तुम दोगे, उसकी तारीफ़ तुम ने कर दी और जो ऊंट अल्लाह तुझे इस की जज़ा में देगा, उसकी तारीफ़ में बयान करता हूं। उन्होंने कहा, हां या रसूलल्लाह! आप ने फ़रमाया, तुम्हें सुराख़दार मोतियों की ऊंटनी मिलेगी, जिसके पांव सब्ज़ ज़बरजद के होंगे और उस पर करीब और रेशम का कजावा रखा होगा। वह तुम्हें लपकने वाली बिजली की सी तेज़ी से पुल-ए-सिरात से गुज़ार देगी।
हज़ारों लोगों का इस्लाम क़ुबूल करना
फिर वह एराबी नबी अलैहिस्सलातु वस्सलाम की महफ़िल से उठकर बाहर निकला। आगे उसे एक हज़ार एराबी मिले, जो हज़ार जानवरों पर सवार और हज़ार नेज़ों और हज़ार तलवारों से मुसल्लह थे। वह उनसे कहने लगा, किधर जा रहे हो? उन्होंने कहा, हम झूठे शख़्स से जंग करने जा रहे हैं, जो ख़ुद को नबी समझता है। उस एराबी ने (जो उन्ही की क़ौम का एक फ़र्द और उनका रईस था) कहा, मैं तो गवाही-देता हूं कि अल्लाह-के-सिवा कोई लाइक़-ए-इबादत नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहु-अलैहि-वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं।
उन्होंने कहा, तुम ने भी यह नया दीन इख़्तियार कर लिया है? उसने कहा, हां कर लिया है। फिर उसने उन्हें (गोह की गवाही से मुतअल्लिक़) सारी बात कह सुनाई। तो उनमें हर कोई यह कहने लगा,
अश्हदु अल ला इलाहा इल्लल्लाह व अश्हदु अन्ना मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह।
नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम को उनके ईमान लाने की ख़बर पहुंची तो आप उन्हें मिलने के लिए तशरीफ़ लाए। वह आप को देखकर सवारियों से कूद पड़े और नबी अकरम अलैहिस्सलातु वस्सलाम के वुजूद-ए-पाक के जिस हिस्से तक उनकी रसाई हो रही थी, उसे चूम रहे थे और साथ-साथ कह रहे थे, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह। फिर वह अर्ज़ करने लगे, या रसूलल्लाह, आप हमें जो हुक्म देना पसंद फ़रमाते हैं, इरशाद फ़रमाएं। आप ने फ़रमाया, तुम ख़ालिद बिन वलीद के झंडे तले होगे।
(शायद वह किसी ग़ज़वा की तैयारी का वक़्त होगा।)
रावी बयान करते हैं:
"पूरे अरब में एक साथ इस्लाम क़ुबूल करने वाले सबसे पहले हज़ार लोग सिर्फ़ बनू सुलैम क़बीले से थे।"
(दलाईल-उन-नुबूव्वह लिल-इमाम अबू नईम, सफ़ह 335-342)
इस वाक़िया से हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की शानो अज़मत का इज़हार होता है के एक गोह भी यह जानता है के आप अलैहिस्सलातु वस्सलामअल्लाह, के रसूल हैं और हमें इस वाकिया से सब्र, हिकमत और अल्लाह पर तवक्कुल का सबक़ मिलता है।और यह वाकिया हमें नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की बुर्दबारी और दावत-ए-इस्लाम का बेहतरीन तरीक़ा सिखाता है।
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