कुरान और हदीस की रौशनी में हलाल व हराम
दोस्तों! आज हम अपने मुआशिरे (समाज), अपनी सोसाइटी और समाज का मुशाहिदा करते हैं तो हम इस नतीजे पर पहुँचते हैं कि हमारी क़ौम एक पाकीज़ा मुआशिरे में ज़िंदगी गुज़ारने के बजाय एक ऐसे माहौल में शब-ओ-रोज़ गुज़ार रही है, जहाँ न हलाल-ओ-हराम की तमीज़ है, न हक़-ओ-बातिल के दरमियान तुर्रा-ए-इम्तियाज़ है और न ही शरीअत-ए-मुतहिरा के पाकीज़ा उसूल-ओ-ज़ावाबित के दायरे में रहकर पाकीज़ा और खुशगवार ज़िंदगी गुज़ारने की कोशिश। उनकी ज़िंदगी का मक़सद सिर्फ़ ज़िंदगी गुज़ारना है चाहे जिस तौर-तरीक़े पर हो। इस लिए में इस तहरीर में "रिज़्क-ए-हलाल की अहमियत और हराम की मुज़म्मत-ओ-नुक़सानात" पर कुरान-ए-मजीद, की रौशनी में कुछ तहरीर करने का शरफ़ हासिल करूँगा। दोस्तों ! अल्लाह तआला ने अपनी कुदरत-ए-कामिला से इस रू-ए-ज़मीन पर बे-शुमार मख्लूक़ात को वुजूद बख़्शा है, अदम से वुजूद में लाया है और हर ज़ी-रूह के रिज़्क़ के अस्बाब-ओ-ज़राइए मुहैया फ़रमा दिए हैं।
हलाल रिज़्क़ इस्लाम की नज़र में क्यूँ ज़रूरी है
अल्लाह तबारक व तआला इरशाद फरमाता है।
तर्जमा: ज़मीन पर चलने वाला कोई ऐसा नहीं जिसका रिज़्क़ अल्लाह के ज़िम्म-ए-करम पर न हो और जानता है कि कहाँ ठहरेगा और कहाँ सुपुर्द होगा, सब कुछ एक साफ़ बयान करने वाली किताब में है। (कन्जुल ईमान)
दोस्तों: आप इंसान को देखें कि अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलातो वस्सलाम और हज़रत हव्वा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के ज़रिए औलाद-ए-आदम, जुर्रियत-ए-आदम की तख़्लीक़ फ़रमाई, तो उसके क़ियाम के लिए ज़मीन का फ़र्श बिछा दिया और उसी ज़मीन को हुसूल-ए-रिज़्क़ का ज़रिया बना दिया कि औलाद-ए-आदम अस्बाब-ओ-ज़राइए को इख़्तियार करे और अपना रिज़्क़ हासिल करे। इस तरह तमाम ज़ी-रूह मख्लूक़ात के लिए रिज़्क़ का ज़रिया ज़मीन को बना दिया। आप जानवरों को देखें कि उनके लिए ज़मीन को सब्ज़ा-ज़ार बना दिया, अब जानवर जहाँ भी सब्ज़ा और हरियाली देखता है, मुँह डाल देता है और अपनी भूख मिटाता है, लेकिन इंसान ऐसा नहीं है, उसे तो अल्लाह तआला ने अशरफुल मख़्लूक़ात बनाया "وَ لَقَدْ كَرَّمْنَا بَنِيٌّ أَدَمَ" का ताज उसके सर पर सजाया है। और उसकी हिदायत-ओ-रहनुमाई और रुश्द-ओ-हिदायत के लिए सही और ग़लत के दरमियान तमीज़ का दर्स देने के लिए, हर दौर में, हर ज़माने में कोई नबी आया है, कोई रसूल आया है, कोई पैग़म्बर आया है, दीन का मुस्लिह और दीन का मुजद्दिद आया है। और पैग़म्बर-ए-आज़म नबी आख़िरुज़्ज़माँ सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के बाद से अब तक शरीअत-ए-मुतह्हिरा के अहकाम को मख़्लूक़-ए-ख़ुदा तक पहुँचाने के लिए हर सौ साल में दीन का कोई मुजद्दिद जल्वा-गर हुआ है, औलिया-ए-अल्लाह की जमाअत आई है और उलमा-ए-रब्बानिय्यीन की आमद हुई है और होती रही है। और उसे ख़ुद हक़-ओ-बातिल, सही-ओ-ग़लत और
हलाल-ओ-हराम के दरमियान फ़र्क़ और इम्तियाज़ पैदा करने के लिए अक़्ल-ए-सलीम अता किया गया है, इस लिए अल्लाह तआला ने उसके रिज़्क़ पर शरीअत का पहरा बिठा दिया है, और शरीअत का क़ानून नाफ़िज़ कर दिया है। अब इंसान जानवरों की तरह जहाँ चाहे हाथ-पैर नहीं मार सकता, जिस तरीक़े पर चाहे, रिज़्क़ हासिल नहीं कर सकता, और जिस तरह चाहे, ज़िंदगी नहीं गुज़ार सकता है बल्कि उसे ज़िंदगी गुज़ारने के लिए और हुसूल-ए-रिज़्क़ और कस्ब-ए-मआश के लिए वह रास्ता इख़्तियार करना पड़ेगा, वह तरीक़ा अपनाना पड़ेगा और उस राह को चुनना पड़ेगा जिसकी रहनुमाई अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाई है।
शैतान इंसान का दोस्त नहीं बलके खुला दुश्मन है
चुनाँचे अल्लाह तआला कुरान-ए-मुक़द्दस के अंदर इरशाद फरमाता है।
तर्जमा: ए लोगो जो कुछ ज़मीन में पाकीज़ा और हलाल चीजें हैं उन्हें खाओ और हराम खाकर और ग़लत रास्ता अपना कर शैतान की पैरवी न करो वह तुम्हारा खुला दुश्मन है। (कन्जुल ईमान)
अल्लाह तबारक व तआला इस आयत-ए-करीमा के अंदर अपने बन्दों की रहनुमाई करते हुए फ़रमा रहा है कि ज़मीन में जो चीज़ हलाल और तय्यिब-ओ-ताहिर और पाकीज़ा हैं सिर्फ़ उन्हीं को खाओ, सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों को कस्ब-ए-रिज़्क़ का ज़रिया बनाओ जो तय्यिब-ओ-ताहिर हों, जो अल्लाह और रसूल के नज़दीक महबूब और पसन्दीदा हों। ग़लत चीज़ों को ज़रिया-ए-मआश मत बनाओ, हराम चीजें खाकर अपनी आक़िबत बर्बाद मत करो, यक़ीन जानो अगर तुमने ग़लत चीज़ों को ज़रिया-ए-मआश बनाया, हुसूल-ए-रिज़्क़ का ज़रिया बनाया और हराम-ख़ोरी को अपनी ज़िंदगी में शामिल कर लिया तो इस में शैतान के नक़्श-ए-क़दम की पैरवी है और शैतान तुम्हारा दोस्त और हामी नहीं बल्कि वह तुम्हारा खुला हुआ दुश्मन है और तुम्हारे साथ उसकी यह दुश्मनी तुम्हें बर्बाद कर के छोड़ेगी।
आयत का सबब ए नुज़ूल
दोस्तों: इस आयत-ए-करीमा का सबब-ए-नुज़ूल यह है कि मुश्रिकीन ने अपनी तरफ़ से बहुत जानवरों को हराम करार दिया था। इस के मुतअल्लिक़ यह आयत-ए-करीमा नाज़िल हुई कि ज़मीन में पैदा शुदा हर चीज़ को अल्लाह तआला ने हलाल किया है और लोगों के नफ़े और फ़ायदे के लिए उन्हें पैदा किया है। लिहाज़ा सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों से बचो जिन्हें अल्लाह तआला ने ख़ुद मना फ़रमा दिया है और जिन चीज़ों से अल्लाह तआला ने मना नहीं फ़रमाया है, वह सब हलाल हैं।
हलाल-ओ-हराम से क्या मुराद है?
हलाल से मुराद वह चीज़ें हैं जो बज़ात-ए-ख़ुद भी हलाल हों और हलाल और जाएज़ तरीक़े से हासिल हुआ हो यानी चोरी, रिश्वत और डकैती वगैरह के ज़रिए हासिल न हो।
हलाल रिज़्क़ तलाशना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है
दोस्तों! अल्लाह ने हमें हलाल रिज़्क़ तलाशने और खाने का हुक्म दिया है, ताकि हमारी दुआएँ कुबूल हों और ज़िंदगी में बरकत रहे। आइए, हम शैतान के फ़रेबों से बचकर कुरआन और सुन्नत के रास्ते पर चलें। हलाल रोज़ी कमाएं खाएं और हराम से बचें। आख़िर में, यह दुआ हम सबके लिए: (ऐ अल्लाह ! हमें पाकीज़ा हलाल रोज़ी अता फ़रमा और हमें हराम से दूर रख)।
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