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namaz aur namazi se mutallik kuch गलतियाँ सवाल व जवाब की रोशनी में

 


नमाज़ और नमाज़ी से मुतअल्लिक़ आम ग़लतियाँ: सवाल-जवाब के ज़रिए वज़ाहत

नमाज़ इस्लाम के अहम अरकान में से है, और इसे सही तरीक़े से अदा करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है। हालांकि, अक्सर नादानी में हम कुछ ग़लतियाँ कर बैठते हैं जिससे हमारी नमाज़ सही अदा नहीं होती और कुछ गलती तो ऐसी हो जाती हैं जिससे नमाज़ ही नहीं होती हैं। इस मज़मून में, हम सवाल-जवाब के ज़रिए नमाज़ और नमाज़ी से मुतअल्लिक़ कुछ आम ग़लतियों और उनके हल पर गुफ़्तगू करेंगे।

नमाज़ और नमाज़ी के मुतअल्लिक़  कुछ गलतियाँ सवाल व जवाब की रोशनी में

सवाल 1: नमाज़ी के आगे से गुज़रना कैसा है?

जवाब: नमाज़ी के आगे से गुज़रना बहुत सख्त गुनाह है। नमाज़ी के आगे से गुज़रने वाला गुनहगार होता है और नमाज़ी की नमाज़ में कोई खलल नहीं आता।

सवाल 2: क्या नमाज़ी के सामने से हटना भी मना है?

जवाब: नहीं। नमाज़ी के सामने से हटना मना नहीं है।

सवाल 3: अंग्रेज़ी पैंट और शर्ट पेहनकर नमाज़ पढ़ना-कैसा है?

जवाब: अंग्रेज़ी पैंट और शर्ट पहनकर नमाज़ पढ़ना मकरूह तन्ज़ीही है।

सवाल 4: आधी-आस्तीन-की शर्ट पेहनकर नमाज़ पढ़ना-कैसा है?

जवाब: आधी-आस्तीन की-शर्ट पेहनकर नमाज़ पढ़ना मकरूह है।

सवाल 5: सजदे में जाते वक्त दोनों हाथों से पायजामे के पाएंचे को पकड़कर चढ़ाना कैसा है?

जवाब: ऐसा करना नाजायज़ और गुनाह है।

सवाल 6: सजदे में कितनी उंगलियों का लगना फ़र्ज़ है?

जवाब: एक उंगली (अंगूठा) का-पेट ज़मीन-से लगना फ़र्ज़ है।

सवाल 7: सजदे में कितनी उंगलियों का लगना वाजिब है?

जवाब: सजदे में तीन-तीन उंगलियों का पेट ज़मीन का लगना वाजिब है।

सवाल 8: क्या सज्दा मैं पांव ज़मीन-से उठे-रहें तो नमाज़ हो जाएगी या नहीं?

जवाब: नहीं।सज्दा मैं पांव ज़मीन-से उठे-रहें तो नमाज़ होगी ही नहीं।

सवाल 9: अगर उंगली का पेट ज़मीन से नहीं लगा बल्कि उंगली का सिरा ज़मीन से लगा तो नमाज़ हो जाएगी या नहीं?

जवाब: ऐसी सूरत में नमाज़ नहीं होगी।

सवाल 10: आधी कलाई से ज़्यादा आस्तीन चढ़ाना कैसा है?

जवाब: आधी कलाई से ज़्यादा आस्तीन चढ़ाना मकरूह तहरीमी है।

सवाल 11: कुछ लोग क़ुरआन की तिलावत और नमाज़ में सिर्फ होंठ हिलाते हैं और आवाज़ बिलकुल नहीं निकालते तो क्या उनकी नमाज़ होती है या नहीं?

जवाब: नहीं। इस तरह पढ़ने से नमाज़ नहीं होगी और क़ुरआन की तिलावत की तो तिलावत का सवाब नहीं पाएगा। आहिस्ता पढ़ना का-मतलब यह है के कम से कम इतनी आवाज़ ज़रूर निकले कि कोई रुकावट न हो तो खुद सुन ले। सिर्फ होंठ हिलना और आवाज़ का बिलकुल न निकलना पढ़ना नहीं है।

सवाल: यदि कमसिन बच्चे अगली सफों में खड़े हों तो पिछली सफों के नमाज़ियों की नमाज़ मकरूह होती है या नहीं?

जवाब: नमाज़ मकरूह हो जाती है। और इसका गुनाह उस लाने वाले पर और बराबर में खड़ा करने वाले पर है।

सवाल: बच्चे और पागल को, जिनसे निजासत का गुमान हो, मस्जिद में ले जाना कैसा है?

जवाब: अगर निजासत का गुमान हो तो मस्जिद-में लेकर जाना हराम है, वरना मकरूह।

सवाल: क्या नमाज़ पढ़ते वक्त जेब से सिक्का या रुपया गिर जाए और उसकी तस्वीर सामने हो तो नमाज़ हो जाएगी या नहीं?

जवाब: नमाज़ हो जाएगी, क्योंकि सिक्के में जो तस्वीर होती है, वह इस कदर छोटी होती है कि ज़मीन पर रखकर देखा जाए तो उसके अज़ा की तफ़सील ज़ाहिर नहीं होती।

सवाल: अगर लोहे, पीतल, तांबे, रांगा वग़ैरा के ज़ेवरात पहनकर मर्द या औरत ने नमाज़ पढ़ी तो क्या उनकी नमाज़ हो जाएगी या नहीं?

जवाब: ऐसे ज़ेवरात पहनकर नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ मकरूह तहरीमी होगी।

सवाल: उल्टा कपड़ा पहनकर नमाज़ पढ़ना-कैसा है?

जवाब: उल्टा कपड़ा पहनकर नमाज़ पढ़ना मकरूह तहरीमी है।

सवाल: क्या औरत अगर मर्द के कपड़े पहनकर नमाज़ पढ़े तो नमाज़ हो जाएगी या नहीं?

जवाब: अगर औरत ने मर्दाना वज़ा के कपड़े पहनकर नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ मकरूह तहरीमी, वाजिबुल-इआदा होगी।

सवाल: जिन कपड़ों मैं जान्दार की तसवीर हो, उन्हें पहनकर नमाज़ पढ़ना-कैसा है?

जवाब: ऐसे कपड़े पहनकर नमाज़ पढ़ना मकरूह तहरीमी है। और अगर उस पर दूसरा कपड़ा पहन लिया कि तस्वीर छुप गई तो अब नमाज़ मकरूह न होगी।

सवाल: मर्द का सजदे में हाथ की कलाईयों को ज़मीन पर बिछाना कैसा है?

जवाब: मर्द का सजदे में हाथ की कलाईयों को ज़मीन पर बिछाना मकरूह तहरीमी है।

सवाल: हालत-ए-नमाज़ में शिद्दत से पाखाना या पेशाब की हाजत मालूम हो या रियाह का ग़लबा हो तो क्या हुक्म है?

जवाब: अगर नमाज़ के दौरान ये हालत पेदा हो जाए और वक्त मैं गुनजाइश हो तो नमाज़ तोड़ देना वाजिब है, और अगर नमाज़ पढ़ ली तो गुनहगार होगा और नमाज़ मकरूह तहरीमी होगी।

सवाल: रूमाल, शाल, चादर वग़ैरा लेकर नमाज़ पढ़ना-कैसा है?

जवाब: रूमाल, शाल, चादर या रजाई वग़ैरा के दोनों किनारे लटके हुए हों तो यह ममनू और मकरूह तहरीमी है। और अगर एक किनारा दूसरे कंधे पर डाल दिया और दूसरा किनारा लटक रहा है तो हरज नहीं। लेकिन अगर चादर या रूमाल सिर्फ एक ही कंधे पर इस तरह डाला कि एक किनारा आगे यानी सीने की तरफ लटक रहा है और दूसरा किनारा पीठ की जानिब लटक रहा है तो भी नमाज़ मकरूह तहरीमी होगी।

नतीजा: नमाज़ में ऊपर ज़िक्र की गई ग़लतियों से बचना ज़रूरी है ताकि हमारी इबादत अल्लाह की बारगाह में  मक़बूल हों  और हम गुनाह से महफ़ूज़ रहें। सही इल्म और एहतियात से हम अपनी नमाज़ को बेहतर बना सकते हैं।


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