अस्सलामु अलैकुम में इसमें नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम के एक मोजज़े के बारे में बताने वाला हूँ के हुज़ूर ने अपने गुलामों की मदद फरमाई और सहाबी का अकीदा भी पढ़ें के हुज़ूर गुलामों की मदद फरमाते हैं
हुज़ूर का करम और मदद
सहाबी ए रसूल हज़रत जाबिर रदीअल्लाहु अन्हु बयान करते हैं फरमाते हैं के हुदैबिया के मकाम पर लश्कर ए इस्लाम को प्यास लगी और हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम के सामने पानी का एक बर्तन था हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने उस से वुज़ू किया तो लश्करी हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की तरफ मुतावज्जह होकर अर्ज़ गुज़ार हुए या रसूलअल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम और पानी नहीं है जिससे हम लोग वुज़ू करें और पीएं सिर्फ यही पानी है जो हुज़ूर के बर्तन में है यह सुनकर हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने अपना हाथ मुबारक उस बर्तन में रख दिया तो पानी ने जोश मारना शुरू कर दिया और अंगुश्ताने मुबारका के दरमियान से यूं पानी निकला जैसे चश्में बह निकले हैं हज़रत जाबिर रदीअल्लाहु अन्हू फरमाते हैं हम सब ने पानी पिया वुज़ू किया, यह बयान सुनकर किसी ने हज़रत जाबिर रदीअल्लाहु अन्हू से पूछा कि आप कितने थे तो फरमाया अगर हम लाख भी होते तो पानी खत्म ना होता मगर थे हम 1500 सौ (बुखारी शरीफ)
सहाबी का अकीदा
हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की कैसी रहमत है कैसा करम है कि दस्ते मुबारक की अंगुश्ताने मुबारका से रहमत के पानी के चश्मे जारी हो जाते हैं गुलाम पानी पी भी लेते हैं जमा भी कर लेते हैं वुज़ू भी कर लेते हैं और हज़रत जाबिर रदीअल्लाहु अन्हु का अकीदा देखें कि हज़रत जाबिर रदीअल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि अगर हम लाख अफराद भी होते तो वह पानी सबको किफायत करता लेकिन थे हम 1500 सौ। यह है सहाबी ए रसूल का अकीदा क्या यह हुज़ूर अलैहिस्सालतु वस्सलाम की तरफ से अपने गुलामों की मदद नहीं है क्या यह हदीस इस बात पर रोशन दलील नहीं है कि मुसीबत ज़दह हज़रात, बारगाहे रिसालत मआब हुज़ूर अलैहिस्सलातु वास्सलम में इस्तिगासा करते हैं और हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम क़ुव्वते खुदादाद से उनकी मदद फरमाते हैं। सुब्हानअल्लाह
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