अस्सलामु अलैकुम दोस्तों इस पोस्ट में चंद ऐसे मुजर्रब वज़ाइफ तहरीर कर रहा हूं जिससे इन पर अमल करने से ज़रूर फाएदा होगा।
शादी पसंद के मुताबिक़ हो
“अगिस्नी अगिस्नी या मुगीसू” को इक्कीस रोज़ पांच सौ मर्तबा पढ़ें, अव्वल आखिर ग्यारह बार दरूद शरीफ पढ़ें, अपने मक़सद का ख्याल दिल में जमाकर पढ़ें, इंशाअल्लाह क़ामयाबी नसीब होगी।
आसेब से बचाओ
“व इज़ा बतश्तुम बतश्तुम जब्बारीन” इस आयत को तीन मर्तबा पढ़कर आसेब ज़दा को पिलादें, इंशाअल्लाह आसेब से निजात मिल जाएगी।
जादू का असर न होगा
“बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” व उमली लहुम इन्ना कैदी मतीन” यह आयत लिखकर बाज़ू पर बांधे, अगर कोई उस शख्स पर जादू भी करेगा तो असर नहीं होगा।
कैंसर का इलाज
फजर की सुन्नत के बाद फर्ज़ से पहले इकतालीस मर्तबा, “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” पढ़े और हर बार अर्रंहीम की मीम को, अल्हम्दु के लाम से मिलाकर पूरी सूरह फातेहा पढ़कर पानी में दम करें और मरीज़ को पिलादें, निहायत ही मुजर्रब अमल है।
दुश्मनों से हिफाज़त के लिए
जब कहीं दुशमनों का खौफ हो तो अव्वल व आखिर दरूद शरीफ के साथ, “अल्लाहुम्मा इन्ना नजअलुका फी नुहूरिहिम व नऊज़ुबिका मिन शुरुरिहिम” (अबू दाऊद) इस दुआ को पढ़ लीजिए, इंशाअल्लाह दुश्मन कुछ न बिगाड़ सकेगा।
ना मर्दी का इलाज
“इय्याका नअबुदु व इय्याका नसतईन” हर रोज़ नमाज़े फजर के बाद सूरह फातेहा की यह आयत मुबारका तीन सौ मर्तबा पढ़ें और यह अमल एक सौ बीस दिन तक जारी रखें, इंशाअल्लाह ना मर्दी का खात्मा हो जाएगा।
घबराहट से निजात पाने के लिए
जिस शख्स को दिल की घबराहट हो वह “या सलामु या अल्लाह” को अव्वल व आखिर दरूद शरीफ के साथ एक सौ मर्तबा रोज़ाना पढ़े, इंशाअल्लाह दिल की घबराहट दूर हो जाएगी।
कमर दर्द से निजात के लिए
जिस शख्स के कमर में दर्द हो वह पंज वक्ता नमाज़ों की पाबंदी करे, और ज़ुहर की नमाज़ के बाद एक सौ इकतालीस मर्तबा “या अल्लाहु या हकीमु” अव्वल व आखिर दरूद शरीफ के साथ पढ़े, इंशाअल्लाह दर्द ख़त्म हो जाएगा।
गैस की बिमारी से निजात का अमल
जो शख्स अव्वल व आखिर दरूद शरीफ और सात मर्तबा “या मुहिय्यु” पढ़कर सीने पर दम करे तो इंशाअल्लाह गैस की बीमारी से निजात पाएगा।
जिसके पास घर न हो
जिस आदमी के पास घर न हो वह रोज़ाना “व-ल-क़द मक्कन्नाकुम फिल अर्दे व-ज-अलना लकुम फीहा मआयिशा क़लीलम मा तशकुरून” एक सौ इक्यावन मर्तबा अव्वल व आखिर दरूद शरीफ के साथ पढ़े, इंशाअल्लाह कामयाबी ज़रूर मिलेगी।
खैरो बरकत का बहतरीन अमल
जब भी किसी से रुपए या माल व ज़र ले तो “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” पढ़ ले, और जब किसी को दे तो, “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलयहि राजीऊन” पढ़ ले, इंशाअल्लाह इस अमल की पाबंदी से ना किसी को देने से कमी आएगी, और ना आमदनी मैं कमी होगी।
अगर औलाद तंग करती हो
अगर किसी को उसकी औलाद ईज़ा देती हो या तंग करती हो तो रोज़ाना असर के बाद “या हन्नानु अंतल लज़ी वसिअता कुल्ला शयइर्रहमतुं व इल्मुन या हन्नान” एक सौ उन्नीस मर्तबा अव्वल व आखिर ग्यारह ग्यारह बार दरूद शरीफ के साथ पढ़कर अल्लाह से दुआ मांगे, इंशाअल्लाह औलाद नेक होगी।
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