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geebat samaaj ka nasoor इससे अपने को और अहल खाना को बचाओ


 ग़ीबत।

आज हमारा मुआशरा बहुत सी बीमारियों में मुब्तिला है, उन बीमारियों में से एक मुहलक बीमारी ग़ीबत है। और करीब करीब हर इंसान इस मुहलक बीमारी में मुब्तिला है, आइए जानते हैं के ग़ीबत क्या है। 

गीबत की तारीफ़।

 गीबत की तारीफ यह है कि किसी की गैर मौजूदगी में उसके मुताअल्लिक कोई ऐसी बात कहना जिसको वह सुनता तो उसे इज़ा और तकलीफ होती, अगर्चे वह सच्ची बात ही हो, मुसलमानों की गीबत करना ऐसा गंदा और घिनौना काम है जैसे कोई अपने मरे हुए भाई का गोश्त नोच नोच कर खाए, क्या इसको कोई इंसान पसंद करेगा, बस समझ लो के गीबत इससे भी ज़्यादा शनीअ और बुरी हरकत है, अल्लाह तआला ने गीबत को हराम फ़रमाया है। दूसरों के बजाए इंसान अगर अपने उयूब पर नज़र रखे और अपने गिरेबान में झांके तो यह बहुत बेहतर है। औलिया ए किराम व बुज़ुर्गाने दीन फरमाते हैं इंसान की सआदत और खुशनसीबी इसी में है के अपने उयूब पर निगाह रखे और उनकी इस्लाह की फिक्र में लगा रहे और जो ऐसा करेगा उसको दूसरों के ऐब निकालना और बयान करने की फुर्सत ही नहीं मिलेगी।  जो शख्स अपने ऐबों को देखने वाला हो जाए, उसकी रूह में एक कुव्वत पैदा हो जाएगी यानी वह रूहानी तौर पर तरक्की कर जाएगा।

गीबत के मुताअल्लिक हदीस शरीफ 

 हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया. शबे मेअराज में उस क़ौम पर गुज़रा जिनके तांबे के नाखून थे वह उन नाखूनों से अपने चेहरे और सीने नोच रहे थे मैंने पूछा ए जिब्राइल यह कौन लोग हैं जिब्राइल ने अर्ज़ किया, यह वह लोग हैं जो दूसरे लोगों का गोश्त खाया करते थे, यानी गीबत करते थे और लोगों की आबरुओं से खेलते थे। (मिश्कात)

 हजरत कअब रज़ीअल्लाहु अन्हु फरमाते हैं जो गीबत से तौबा करते हुए मरे वह जन्नत में आखिर में जाएगा, और जो गीबत करता हुआ मरे और उसको तौबा की तौफीक ना मिले तो वह सबसे पहले जहन्नम में जाएगा, (मुकाशिफतुल क़ुलूब)

चुगली खाना मुरदार खाने के मानिंद है 

चुनांचे हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम के सामने एक शख्स ने ज़िना का इकरार किया और उसको संगसार कर दिया , हाज़रीन में से एक शख्स ने दूसरे आदमी से कहा इसको इस तरह बिठाया था जिस तरह कुत्ते को बिठाते हैं फिर हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम का उन लोगों के साथ एक मुरदार के पास से गुज़र हुआ आप ने उस शख्स से कहा तुम इस मुर्दार को खाओ अर्ज़ किया में किस तरह से खा सकता हूँ हुज़ूर ने फ़रमाया अभी जो तुमने अपने भाई का गोश्त खाया (चुगली की) वह इस मुरदार से भी बदतर और गन्दा था हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फ़रमाया गीबत का सुनना भी गुनाह में शरीक होने के बराबर है (कीमाए सआदत)

गीबत करने वाले की न नेकी कुबूल और न ही दुआ कुबूल होती है गीबत करने वाला जन्नत से भी महरूम रहेगा ! (हदीस)

यह वाकिआत पढ़ें और सबक हासिल करें 

हजरत मैमून फरमाते हैं एक मर्तबा ख्वाब में एक हब्शी की सड़ी हुई लाश मेरे सामने लाई गई और मुझसे कहा गया कि इस लाश का गोश्त खाओ, मैंने कहा मैं क्यों खाऊं, मुझसे कहा गया कि आपको खाना पड़ेगा इसलिए कि आपने फलां की गीबत की थी, मैंने कहा खुदा की कसम उसकी गीबत मैंने नहीं की थी, मुझसे कहा गया गीबत तूने सुनी तो थी, गीबत सुनना भी तो गीबत करना है, उस ख्वाब के बाद हज़रत मैमून न खुद कभी किसी की गीबत करते और न किसी को अपनी मजलिस में गीबत करने देते थे। (मज़हरी व रुहुल ब्यान)

क़यामत के दिन गीबत करने वाले की नेकियाँ उसे दी जाएंगी जिसकी उसने गीबत की होगी 

 हज़रत हसन बसरी से किसी ने कहा फलां शख्स ने आपकी गीबत की है, तो आपने गीबत करने वाले शख्स के पास खजूरें भेजीं, और साथ कहला भेजा तूने मेरी गीबत करके अपनी नेकियां मुझे दी हैं यह उसका बदला है। (नुज़हतुल मजालिस)

 दोस्तों गीबत हराम हैं और बहुत बुरी चीज़ है, इससे हमें और आपको बचना चाहिए।



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