अज़ाबे क़ब्र से बचने की चंद दुआएं।
रब्बना आतिना फिद्दुनिया हसनतंव वफिल आखिरति हसनतंव वकिना अज़ाबन्नार
ए रब हमारे, हमें दुनिया में भलाई दे, और हमें आख़िरत में भलाई दे, और हमें अज़ाबे दोज़ख से बचा।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल कुफरी वल फकरी व अज़ाबिल क़ब्र
ए अल्लाह, में पनाह मांगता हूं कुफ्र से, तंगदस्ती से, और क़ब्र के अज़ाब से।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबन नारि व अज़ाबिल क़ब्री वमिन फितनतिल महया वल ममाती शर्रिल मसिहिद दज्जाल
ए अल्लाह, में तुझसे पनाह मांगता हूं जहन्नम के अज़ाब से, और क़ब्र के अज़ाब से, और ज़िंदगी और मौत के फ़ितनों से, और काने दज्जाल के शर से।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबिल कबरी व अऊज़ु बिका मिन फितनतिल मसिहिद दज्जाल व अऊज़ु बिका मिन फितनतिल महया वल ममाती अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल मा'समि वल मगरमि
ए अल्लाह में तेरी पनाह लेता हूं, क़ब्र के अज़ाब से, और तेरी पनाह लेता हूं काने दज्जाल के फ़ितना से, और तेरी पनाह लेता हूं, ज़िंदगी और मौत के तमाम फ़ितनों से, ए अल्लाह, में पनाह लेता हूं, हर गुनाह और क़र्ज़ से, (तू मुझे उनसे बचा ले)।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-जिबनि व अऊज़ु बिक मिन अन उरद्दा इला अरज़लिल-उमरि व अऊज़ु बिक मिन फितनतिद-दुन्या व अऊज़ु बिक मिन अज़ाबिल-क़ब्र।
ए अल्लाह, में तुझसे पनाह मांगता हूं, बुज़दिली और बे इज़्ज़ती से, और में तुझसे पनाह मांगता हूं, इससे के, निकम्मी और रज़ील उमर (उमर का बदनाम, शर्मनाक, इब्रतनाक, और ज़लील अरसा) को पहुंचूं, और में तुझसे पनाह मांगता हूं, दुनिया के फ़ितनों से, और में पनाह मांगता हूं, क़ब्र के अज़ाब से।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-बुख्लि व सूइल-उमुरी व फितनतिस-सदरि व अज़ाबिल-क़ब्र।
ए अल्लाह, में तेरी पनाह लेता हूं, बुख्ल से, और बुरी उम्र से, और नफ्स के हर फ़ितना से, और क़ब्र के अज़ाब से।
अंजाम ब खैर का बेहतरीन अमल।
साहिबे ईमान रहते हुए इस दुनिया से जाना बड़े मुकद्दर की बात है, “या रहीमु” को रोज़ाना 285 मर्तबा पढ़ने वाला, साहिबे ईमान मरेगा, उसका खात्मा बिलखैर होगा, सकरात और नज़अ के आलम में आसानी पैदा होगी, क़ब्र की मनाज़िल बड़े आराम से तै होंगी, अल्लाह तआला उस पर हद से ज़्यादा रहम करेगा, और उसकी क़ब्र को कुशादा करके, मिस्ल जन्नत कर दिया जाएगा, और आख़िरत में उसकी निजात होगी।
क़ब्र में राहत का अमल।
अगर कोई “या बारी” रोज़ाना एक सौ मर्तबा पढ़ने का मामूल बनाले, तो अल्लाह तआला उसे मरने के बाद क़ब्र में राहत नसीब फरमाएगा, और उसकी क़ब्र को मिस्ल जन्नत कर देगा।
या करीमु का जामे वज़ीफा।
यह वज़ीफा गुनाहों से मुआफी के लिए बहुत मुअस्सर है, लिहाज़ा रोज़ाना 105 दिन तक बिला नागा पढ़े, उसकी आख़िरत में निजात होगी, अज़ाबे क़ब्र से बच जाएगा। अगर कोई नुकसान पहुंचाने के दर पे हो तो, इस वज़ीफे को 40 दिन तक 2041 मर्तबा रोज़ाना पढ़ें, इंशा अल्लाह, अल्लाह तआला की पनाह में रहेंगे, और दुश्मन ज़र्रा भर भी नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा।
या करीमल-अफ़वि ज़ल-अदलि अंतल्लज़ी मला कुल्ला शैइन अद्लुहू या करीम।
ए दर गुज़र करने वाले करीम, ए अदल वाले, तूने हर चीज़ को अपने अदल से भर दिया है, ए करम वाले।
अज़ाबे क़ब्र से निजात।
जो शख्स “या अहद” फजर की नमाज़ के बाद 11 सौ मर्तबा रोज़ाना पढ़े, और ता दम आखिर पढ़ता रहे, वह इंशा अल्लाह, अज़ाबे क़ब्र से महफूज़ रहेगा, इस इस्म की बरकत से उसकी क़ब्र, अल्लाह के नूर से रोशन हो जाएगी, और वुसअत नज़र तक कुशादा हो जाएगी।
या वारिसु का अमल।
तुलूअ आफताब से पहले, जो शख्स “या वारिसु” 100 मर्तबा पढ़ता रहे, अज़ाबे क़ब्र से महफूज़ रहेगा, शको शुबह दिल से निकल जाएगा।
हिकायत।
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम क़ब्र पर गुज़रे, देखा के मैय्यत पर अज़ाब हो रहा है, यह देखकर चंद कदम आगे तशरीफ ले गए, और जब वापस आए, अब जो उस क़ब्र पर गुज़रे, तो मुलाहिज़ा फरमाया के उस क़ब्र में नूर ही नूर है, और वहां रहमते इलाही की बारिश हो रही है, आप बहुत हैरान हुए और बारगाहे इलाही में अर्ज़ किया के मुझे इसका भेद बताया जाए, इरशाद हुआ के रुहुल्लाह, यह सख्त गुनाहगार और बदकार था, इस वजह से अज़ाब में गिरफ्तार था, लेकिन इसने अपनी बीवी हामला छोड़ी थी, इसके हां लड़का पैदा हुआ और आज उसको मकतब में भेजा गया उस्ताद ने उसको “,(बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम),” पढ़ाई, हमें हया आई के में ज़मीन के अंदर इस शख्स को अज़ाब दूं के जिसका बच्चा ज़मीन पर मेरा नाम ले रहा है, इस रिवायत से मालूम हुआ के बच्चों की नेकी से मां बाप की निजात हो जाती है।
हज़रत अली रदी अल्लाहु अन्हू से रिवायत है, के नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया जो शख्स मुसलमानों के कब्रिस्तान से गुज़रे और सूरह इखलास 11 मर्तबा पढ़कर इसका सवाब अहले क़ब्र को बख्शे तो उसको सूरह इखलास पढ़ने का इतना सवाब मिलेगा जितने के उस कब्रिस्तान में मुर्दों की तादाद है। (फ़वाईदुल कुबरा)
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* कुल हूवल्लाहु अहद। अल्लाहुस समद। लम यलिद वलम यूलद। वलम यकुल्लहू कुफ़ुवन अहद।
قُلْ هُوَ الله
أَحَدُ اللهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
( سورة اخلاص)
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