qtESQxAhs26FSwGBuHHczRGOCdrb3Uf78NjGuILK
Bookmark

Nabi Maliko Mukhtar सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम

 

मालिक व मुख्तार नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान 

अस्सलामु अलैकुम दोस्तों!
इस पोस्ट में आप हमारे प्यारे नबी करीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम के अज़ीम इख्तियारात, के बारे में पढ़ेंगे। ये वो खुबसूरत और रोशन बातें हैं जो आपके दिलों को ईमान की रोशनी से भर देंगी! अल्लाह तआला हमें नबी करीम सल्लल्लाहु-अलैहि-वसल्लम की शान और आपकी अज़मत को समझने की तौफीक अता फरमाए।

अकबा इब्ने आमिर से मरवी है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इर्शाद फरमाया कि मैं अपने हौज़ को इस वक्त देख रहा हूँ, और मुझ को तमाम रूए ज़मीन के खज़ानों की कुन्जियाँ दी गई हैं।

(सहीह बुखारी व सहीह मुस्लिम)

इस हदीस में हुज़ूर ने हौज़े कौसर को अपना हौज़ फरमाया गोया आप इसके मालिक हैं और सारी रूए ज़मीन के खज़ानों की कुन्जियाँ खुदा ए तआला ने आप को अता फरमाई हैं यानी आप दोनों जहाँ में मालिक व मुख्तार हैं।

हज़रत अमीर मुआविया ने लोगों को खिताब करते हुए फरमाया कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम को मैं ने यह फरमाते हुए सुना है कि अल्लाह तआला जिस से भलाई का इरादा फरमाता है इस को दीन में समझ अता फरमाता है और बेशक मैं बाँटने वाला हूँ और अल्लाह देने वाला। (सहीह बुखारी)

इस हदीस को पढ़ कर खूब रौशन हो गया होगा कि जो कुछ जिस को अल्लाह तआला अता फरमाता है वह सब हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम तक़्सीम फरमाते हैं और वह आप की चौखट से मिलता है।

एक और हदीस मुलाहिज़ा करें 

हज़रत अबू हुरैरा रजियल्लाहों अन्हो फरमाते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहे वसल्लम की खिदमत में अर्ज़ किया कि मैं आप से बहुत सारी हदीसें सुनता हूँ लेकिन भूल जाता हूँ आप ने फरमाया अपनी चादर फैलाओ। मैंने अपनी चादर बिछा दी। आप ने दोनों हाथों से लप बना कर चादर में कुछ डाल दिया और फरमाया इस को लपेट लो। मैंने चादर को लपेट लिया और इस के बाद मैं कभी कोई बात नहीं भूला। "(बुखारी)

इस हदीस को देखिये कैसे रूहानी इख्तियारात हैं। और कैसी खुदादाद कुदरत है। हुज़ूर खाली चादर में बज़ाहिर खाली लप बना कर डालते हैं और कैसी बे मिसाल याद-दाश्त अता फरमाते हैं और हुज़ूर की अता व बखशिश का नतीजा है कि जनाब अबू हुरैरा से जितनी अहादीस रिवायत की गई हैं वह और किसी सहाबी से नहीं।

एक और हदीस पढ़े और ईमान ताज़ा करें 

हज़रत अनस रज़ि अल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है कि एक शख़्स हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम की ख़िदमत में उस वक्त हाज़िर हुआ जबकि आप मदीने में नमाज़े जुमा के लिये खुतबा दे रहे थे उसने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह बारिश न होने की वजह से सूखा पड़ गया है लिहाज़ा आप अपने रब से बारिश मांगिए। तो हुज़ूर ने आसमान की तरफ देखा और आसमान पर बादल का नाम व निशान तक न था लेकिन आपने दुआ मांगी तो बादल के टुकड़े एक दूसरे से आकर मिलने लगे और फिर बारिश होने लगी यहां तक कि मदीने की गलियां पानी से भर गयीं और बारिश लगातार अगले जुमे तक होती रही। फिर वही आदमी या कोई और उस वक्त खड़ा हुआ जब हुज़ूर खुतबा दे रहे थे और अर्ज़ करने लगा या रसूलुल्लाह हमतो डूबने लगे लिहाज़ा अपने रब से दुआ कीजिए कि इस बारिश को रोक ले। हुज़ूर मुस्कुराए और फरमाया ऐ अल्लाह हमारे इर्द गिर्द बरसा हम पर न बरसा यह दो तीन बार कहा कि बादल छंटने लगे और मदीने के इधर उधर जाने लगे और हमारे आसपास बारिश होने लगी और हमारे ऊपर से हट गई। हज़रत अनस कहते हैं कि यूँही अल्लाह तआला अपने नबी की शान और आपकी बरकत व रहमत और आपकी दुआ की कुबूलियत लोगों को दिखाता है।( बुखारी )

इस हदीस से यह अच्छी तरह समझ में आ जाता है कि सारी काएनात का खालिक व मालिक हुज़ूर की मर्जी को नहीं टालता और आपके मुंह से निकली हर बात फौरन पूरी फरमाता है और जिसकी मर्ज़ी खुदा न टाले इसको मजबूर नहीं कहा जा सकता मुख्तारे कुल काएनात ही कहा जाएगा। इस हदीस से यह भी मालूम हुआ कि मुसीबत व परेशानी में खुदा ए तआला के महबूब बन्दों की बारगाहों में हाज़िर होना और बारगाहे खुदा वन्दी में इनको वसीला बनाना जाइज़ है। वरना दुआ खुद भी मांगी जा सकती है इनसे दुआ कराने का मतलब वसीला नहीं तो और क्या है!

दोस्तों, ऐसे प्यारे नबी का उम्मती होना हमारी सबसे बड़ी खुशकिस्मती है।

दुरूद व सलाम पढ़ते रहिए और हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम की मोहब्बत से अपने ईमान को ताज़ा कीजिए।
जज़ाक अल्लाह खैर।

0

एक टिप्पणी भेजें

please do not enter any spam link in the comment box.