औलिया अल्लाह की बरकत से मगफिरत हो गई
अस्सलामु अलैकुम: दोस्तों इस पोस्ट में औलिया अल्लाह की अजमत के बारे में बताने वाला हूं जिससे आप को यह मालूम हो जाएगा के औलिया अल्लाह का मर्तबा क्या है, औलिया अल्लाह का वह मकाम है, के अल्लाह तआला औलिया की बरकत से गुनाहगार की बख्शिश व मगफिरत फरमा देता है।
सौ आदमियों का कातिल
दोस्तों: अल्लाह तआला के औलिया और नेक बंदों की बरकत मुसल्लम है सही बुखारी और सही मुस्लिम की हदीस है जिसमें पहली उम्मतों के एक शख्स का वाकिया है जो 100 बंदों का कातिल था उसे जब बताया गया कि फलां बस्ती में सालेहीन, अल्लाह के वली इबादत गुज़ार बंदे रहते हैं उनके पास जाकर तौबा कर, उम्मीद है तेरी तौबा क़बूल हो जाएगी, चुनांचे वह उस बस्ती की तरफ रवाना हुआ तो रास्ते ही में उसे मौत आ गई मौत के वक्त उसने अपना सीना सालेहीन की बस्ती की तरफ कर लिया था वह फौत हो गया तो उसके मुतालिक रहमत और अज़ाब के फरिश्तों का इख्तिलाफ हो गया फिर उनके पास आदमी की सूरत में एक फरिश्ता आया उन्होंने उसको अपने दरमियान हुक्म (सालिस) बना लिया उसने कहा दोनों ज़मीनों की पैमाइश करो वह जिसके ज़्यादा करीब हो उसी के मुताबिक फैसला होगा, फिलवाके जिस बस्ती से वह आ रहा था करीब थी और सालेहीन की बस्ती दूर थी मगर अल्लाह तआला ने सालेहीन की बस्ती को हुक्म दिया के करीब हो जा और जहां से गुनाह करके आ रहा था उसे फरमाया दूर हो जा, फिर पैमाइश की गई तो उस ज़मीन के ज़्यादा करीब था, जहां सालेह लोग रहते थे, चुनाँचे रहमत के फरिश्तों ने उसकी रूह पर कब्ज़ा कर लिया। (सही मुस्लिम सही बुखारी)
औलिया किराम का मक़ाम
इस हदीस से अल्लाह तआला के हां औलिया किराम की कदर व मंज़िलत का पता चलता है, कि अगर कोई गुनहगार तौबा के इरादे से उनकी तरफ रवाना हो जाए, अभी वहां न पहुंचा हो और ना तौबा की हो तब भी उसे बख्श दिया जाता है।
मुस्लिम शरीफ की एक रिवायत में हदीस के कलमात है -القرية الصالحة - यानी सालेह बस्ती, हालांके बस्ती में नेक व बद हर तरह के लोग होते हैं मगर सालेहीन की वजह से पूरी बस्ती को करिया सालेह फरमाया गया। इस हदीस से पता चला कि सालेहीन की बरकत से मगफिरत हो जाती है।
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