रोज़-मर्रा की मसनून दुआएं
"अस्सलामु अलैकुम दोस्तों! इस पोस्ट में रोज़-मर्रा की मसनून और मक़बूल दुआओं का मज़मून तहरीर किया गया है। ये दुआएं हमारे रोज़मर्रा के कामों को अल्लाह की रहमत और बरकत से भर देती हैं। हर दुआ की अहमियत और मफ़हूम को समझते हुए इन्हें अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाना बेहद ज़रूरी है।"
रोज़-मर्रा की मसनून व मक़बूल दुआएं
सोते वक़्त की-दुआ:
अल्लाहुम्मा बिस्मि क अमूतु व अहया। (बुख़ारी व मुस्लिम)
अच्छे ख़्वाब की-दुआ:
अल्हम्दु लिल्लाह, कहें और नेक आदमी से ताबीर पूछें। (मिश्कात)
बुरे ख़्वाब की ताबीर:
अऊजु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम व मिन शरें हाज़िहिर्रुस्या। (मिश्कात हसन)
नींद से उठने की-दुआ:
अल्हम्दु-लिल्ला-हिल्लज़ी अहयाना ब अदमा अमातना व इलैहिन्नुशूर। (बुख़ारी)
बैतुल ख़ला जाने-की-दुआ:
अल्ला-हुम्मा इन्नी अऊजु बि क मिनल-ख़ुब्सि वल-ख़बाइस। (अबू दाऊद)
(नोट: बैतुल ख़ला के बाहर ही दुआ पढ़ें!)
बैतुल ख़ला से निकलने-की-दुआ:
अल्हम्दु-लिल्ला-हिल लज़ी अज़हब अन्निल अज़ा व आफ़ानी। (इब्ने माजा)
वुज़ू के बाद की-दुआ:
अल्लाहुम्मज अलनी मिनत्तव्वाबीना वज अलनी मिनल मुततहिरीन। (हिस्ने हसीन)
लिबास पहनने की-दुआ:
अल्हम्दु-लिल्ला-हिल लज़ी कसानी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन गैरि हौलिन मिन्नी वला कुव्वतिन। (तिर्मिज़ी)
खाना खाने की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि व अला बरकतिल्लाह।
खाने के दौरान:
अल्लाहुम्मा लकल हम्दु व ल क शुकरुक।
खाना खाने के बाद की-दुआ:
अल्हम्दु लिल्लाहिल लज़ी अतअमना व सक़ाना व कफ़ाना व जअलना मिनल मुस्लेमीन। (तिर्मिज़ी)
दावत खाने के बाद की-दुआ:
अल्लाहुम्मा अतइम मन अतअमनी वस्क़ि मन सक़ानी। (तिर्मिज़ी)
घर से बाहर निकलने की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि तवक्कलतु अलल्लाहि ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह। (तिर्मिज़ी)
मस्जिद-में दाख़िल होने की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि वस्सलामु अला रसूलिल्लाहि अल्लाहुम्मफ़्तह ली अब्वाबा रहमतिका। (मुस्लिम)
मस्जिद-से बाहर निकलने की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि वस्सलामु अला रसूलिल्लाह। अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलु क मिन फ़ज़्लि क व रहमतिक।
घर-में दाखिल होने की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि वलजना व अलल्लाहि रब्बना तवक्कलना। (मुस्लिम)
सवारी की-दुआ:
बिस्मिल्लाहि अल्हम्दु लिल्लाहि सुब्हानल्लज़ी सख्ख र लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुक्रिनीना व इन्ना इला रब्बिना मुंक़लिबून। (अबू दाऊद)
किसी मंज़िल पर उतरने की-दुआ:
अऊजुबि कलिमातिल्लाहित्ताम्माति मिन शरिं मा ख़ल क़। (मुस्लिम)
नया-चाँद देखने की-दुआ:
अल्लाहुम्मा अहिल्लहू अलैना बिलयुम्नि वल ईमाने वस्सलाम। (इब्ने हिब्बान)
नया काम शुरू करने से पहले की-दुआ:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। अल्लाहुम्मा ख़िरली व बख़्तरली। (तिर्मिज़ी)
इल्म में तरक़्क़ी की-दुआ:
हर नमाज़ के बाद:
अल्लाहुम्मन्फ़ानी बिमा-अल्लमतनी व-अल्लिमनी मा यन्फ़उनी वज़िदनी इल्मा। (तिर्मिज़ी)
"इस्लामी मसनून दुआएं हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा हैं। इन दुआओं से न सिर्फ हमारी ज़िंदगी में बरकत होती है बल्कि हर काम को अल्लाह के हुक्म और रहमत के साथ पूरा करने की तौफ़ीक़ मिलती है। दुआओं को याद करके अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें और इस्लामिक तहज़ीब को ज़िंदा रखें। अल्लाह हमें सही रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।"
एक टिप्पणी भेजें