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Bismillah की फ़ज़ीलत


अस्सलामु अलैकुम : दोस्तों आप इस मज़मून में  बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम की फज़ीलत के बारे में पढ़ेंगे !

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम की फज़ीलत

जो खुदा का ज़िक्र करने वाले हैं उनके वास्ते
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम'

एक बड़ा ज़ख़ीरा है और उस के मुश्ताकों के वास्ते बड़ी नेअमत है। इस का विर्द तमाम बलाओं के वास्ते मूजिबे खलासी और खुदा के वसीलों के वास्ते एक चमकता हुआ चिराग़ है।

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिरहीम'
ज़्यादा पढ़े तो फरिश्ते अज़ाब न करेंगे।
" بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ"
के हुरूफ उन्नीस हैं

बीमारी से शिफा

जाबिर बिन अब्दुल्लाह से रिवायत है कि हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया कि, "अल्लाह जल्ल-शानुहू ने अपनी इज़्ज़त व जलाल की कसम खाई है कि अगर किसी चीज़ पर मेरा नाम पढ़ा जाए तो उस में ज़रूर बरकत हो जाएगी, अगर बीमार है तो शिफा हो जाएगी।

अज़ाब में तख्फीफ

हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया कि अगर किसी काग़ज़ पर"बिस्मिल्लाह" लिखी हो और वह ज़मीन पर गिर पड़ा हो, उसको ताज़ीम के लिहाज़ से कोई उठाले तो उस का नाम सिद्दीकों में लिखा जाता है।
अगर उस के माँ-बाप अज़ाब में हों तो अज़ाब तख़्फ़ीफ किया जाता है।
दस हज़ार दर्जात
हज़रत सैय्यदना अबू बक्र सिद्दीक रदीअल्लाहु अन्हु ने ब्यान किया के हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया, जो कोई,
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
पढ़े, उसके लिए दस हज़ार दर्जात लिखे जाते हैं।

जहन्नम की आग हराम

हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने फरमाया, अपनी तमाम उम्र में किसी शख़्स ने एक लाख बार
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
पढ़ी हो तो अल्लाह तआला उस पर दोज़ख़ की आग हराम कर देगा।
रिवायत है हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने बीबी ख़दीजा रदीअल्लाहु अन्हा को बाद इन्तिकाल ख़्वाब में देखा, फरमाया वास्ते क्या तोहफा भेजूं जिस से कि तुम्हारी रूह खुश हो तो बीबी ने फरमाया कि
بسم اللہ الرحمن الرحیم
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
ज़्यादा पढ़कर सवाब बख़्शिए।

हूरें खिदमत में

रिवायत है कि हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम को एक मुर्दे के हाल पर रहम आया, इतने में हज़रत जिब्रईल अलैहिस्सलाम तशरीफ लाए और कहा कि, "या रसूलुल्लाह! दस मर्तबा,
بسم اللہ الرحمٰن الرحیم
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
पढ़कर उस मुर्दे पर बख्शिए हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने  पढ़ कर बख़्शा, फौरन उस मुर्दे पर से अज़ाब उठा लिया गया और हूरें उस की ख़िदमत में हाज़िर हो गईं। हूरों से हुज़ूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम ने पूछा! "तुम कब तक रहोगी? अर्ज़ किया कि सूर फूंकने और बिहिश्त में दाखिल होने तक।
अज़ाब से हिफाज़त
किफाया शोबी में लिखा है कि एक शख़्स ने अपने लड़के को वसीयत की कि जब मरूं तो बाद गुस्ल मेरी पेशानी पर और सीने पर
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
 लिख देना। ऐसा ही किया गया। जब उस शख़्स को कब्र में रखा गया और फरिश्ते अज़ाब के आए तो उसकी पेशानी और सीने पर
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيم
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 
लिखा देख कर कहा कि अज़ाब से बे फिक्र हो गया। "बिस्मिल्लाह' की बरकत से बख्शा गया  

मगफिरत हो गई

इसी किताब में लिखा है कि एक फासिक व गुनहगार था। मरने के बाद किसी ने ख़्वाब में देख कर दरयाफ़्त किया कि, तेरे साथ क्या मामला हुआ? उसने कहा कि मैं बख़्शा गया, इसलिए कि मैं रोज़ाना सौ मर्तबा

بسم اللہ الرحمٰن الرحیم
"बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम' 

पढ़ कर उसकी बरकत से गुनाहों की माफी चाहता था खुदावन्द तआला मुझे बख़्श दिया।

दोस्तों बिस्मिल्लाह शरीफ के बहुत से फ़ज़ाइल हैं मैंने यहाँ पर कुछ का ब्यान किया !
अल्लाह हम सबको बिस्मिल्लाह शरीफ कसरत से पढ़ने की तौफीक अता फरमाए ! आमीन 

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