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वह काम जिनको करने से गरीबी आती है Gareeb insaan

वह बातें जिनसे परहेज जरूरी है वह बातें जिसकी बे तवज्जही से इंसान मुफलिसी तंगदस्ती मोहताजी कल्लाशी मैं मुब्तिला होता है जिसका जिक्र कुरान और हदीस मैं मिलता है और अक्सर ओ बेशतर वह है जो अकाबिर मिल्लत ओ रहनुमा ए शरीयत ने अपने अपने मुशाहिद ए और तजुर्बे से दरयाफ़्त की तो जो इन बातों से अपने आप को दूर रखेगा खुद ही नफा उठाएगा और जो इनमें मुलव्वस होगा वह खुद देख लेगा के उसने क्या खोया और क्यों कर खोया हां इंसान को इस बात से कभी गाफिल नहीं होना चाहिए के मोअस्सर ए हकीकी रब्बे कदीर है और हर फायदा नुकसान की कुंजी उसके दस्त ए कुदरत में है वह चाहे करे उससे कोई पूछने वाला नहीं

वह बातें जिनसे गरीबी आती है

अब आइए वह बातें जान लें जिनकी वजह से गरीबी और मुफलिसी आती है

(1) झूठ बोलना

(2) गुनाहों में मशगूल रहना

(3)जिना करना

(4)झूठी कसमें खाना

(5)जनाबत में खाना खाना

(6)बिरहना पेशाब करना

(7)रात में झाड़ू देना खुसुसन कपड़े से झाड़ना

(8)नाखून दांत से तराशना

(9)पैजामा या दामन या आंचल से मुंह पोंछना

(10) फक़ीरों से रोटी के टुकड़े खरीदना

(11)खड़े होकर पैजामा पहनना

(12)बैठकर दस्तार यानी अमामा बांधना

(13)खुश्क बालों में कंघा करना या खड़े होकर बाल काढ़ना

(14)टूटा गंगा इस्तेमाल करना

(15)मां बाप के नाम लेकर पुकारना

(16)मिकरास यानी कैंची से मुए जेरे नाफ़ काटना

(17)40 रोज़ से ज्यादा जेरे नाफ के बाल रखना

(18)बुजुर्गों के आगे चलना

(19)दरवाजे पर बैठने की आदत करना

(20)लहसुन प्याज के पोस्त जलाना

(21)मकड़ी के जाले दूर ना करना

(22)जुं को जिंदा छोड़ना

(23)नमाज काहेली करना

(24)फटे हुए कपड़े को ना सीना

(25)फजर की नमाज पढ़कर मस्जिद से जल्द निकल आना

(26)सुबह के वक्त सोना

(27)औलाद पर बावजूद मालदारी तंगी करना

(28)बगैर हाथ धोए खाना खाना

(29)खाने के बाद बर्तन साफ ना करना

(30) अहलो अयाल से लड़ते रहना

(31) ख़िलाल करते वक्त जो रेशे निकले उसे फिर मुंह में रख लेना

(32)हर किस्म की लकड़ी से ख़िलाल करना

(33)खाने-पीने के बर्तन खुले हुए रखना

(34)चिराग मुंह की फूक से बुझाना

(35)औंधे हुए जूते को देखना और सीधा ना करना

(36)दौलत बे ज़वा में लिखा है अगर रात भर जूता ओंधा पड़ा रहा तो शैतान उस पर आकर बैठता है वह उसका तख्त है (37)बकरियों के गल्ले में घुसकर चलना शाम के वक्त खूसुसन

(38)औलाद को गाली देना या लानत करना

(39)फकीर को झिड़क देना

(40) बायां पांव पहले पजामे में डालना और बाएं हाथ की आस्तीन पहले पहनना

(41)कब्रिस्तान में हंसना

(42)कूड़ा करकट घर में जमा रखना

(43)सुबह होते ही खुदा और रसूल का नाम लिए जिक्र किए बगैर दुनिया में मशगूल हो जाना

(44)मगरिब और ईशा के दरमियान सोना

(45)गाने बजाने में दिल लगाना

(46) सिला रहमी ना करना

(47)जनाबत की हालत में नाखून तरशवाना या सर मुंडाना या मुंए जेरे नाफ वगैरह साफ करना

(48) ज़कात व सदक़ात वाजीबा मसलन कुर्बानी और कफ़्फ़ारा क़सम वगैरा के अदा करने में बुखल करना या खामखा उन्हें टालते रहना

(49)बगैर हाजत सवाल करना

(50)अमानत में खयानत करना

(51)अंधेरे में खाना खाना

(52)मां बाप को इज़ा देना

(53)कमार बाज़ी गाने बजाने के आलात वगैरह घर में रखना हदीस शरीफ में है कि जिस घर में शराब और दफ और सारंगी सितार वगैरह हो उस घर में आदमियों की दुआ कुबूल ना होगी और ना उस घर में रहमत के फरिश्ते का नूज़ुल होगा

(54)रास्ते में पेशाब करना और बेसतरी हो तो हराम गुना

(55)हमेशा बे वोह गोई मसखरा पन और हज़लयात मजाक दिल्लगी में मसरूफ रहना

(56)नंगे सर खाना खाना

(57)नंगे सर बैतूल खला में जाना

(58)निकले हुए खाने में देर ना करना के खाना दस्तरखान पर उल्टा उनका इंतजार करे

(59)बिरहना सर बाजार में फिरना और औरतों का नंगे सर रहना और अजनबीयों के सामने उसी हालत में आना-जाना हराम हराम और सख्त गुनाह है

(60)सजदा तिलावत ना करना या बा वज़ू होते हुए उसमें देर लगाना

(61)तिलावत कुरान की दौरान आयत सजदा छोड़ कर आगे बढ़ना

(62)दूसरे शख्स का कंघा आदतन मांगकर इस्तेमाल करना खुसुसन शाफ कीए बगैर के दूसरे के बाल उसके बालों में उलझें (63) हौज़ या तालाब या बहते पानी में पेशाब करना इससे निसयान भी पैदा होता है दौलत बेजवाल में लिखा है कि 5 चीजों से भूल पैदा होता है हौज वगैरह में पेशाब करना राख पर पेशाब करना चूहे का झूठा खाना किब्ला की तरफ मुंह करके पेशाब करना जिंदगानी हरामखोरी में गवाना बल के गौर कीजिए तो यह आखिरी एक मुस्तकिल बला व अज़ाब  है

(64)सोते वक्त पैजामा या तेहबंद के सर के नीचे रखकर सोना दौलत बे ज़वाल में लिखा है कि इससे ख्वाब खौफनाक नजर आते हैं

(65)बिरहना होकर सोना

(66)नहाने की जगह पेशाब करना

(67) बिला ज़रूरत बिस्तर के पास सिलपची या पानी का लोटा पेशाब के लिए रखना

(68)नमाज कज़ा कर देना

(69)मस्जिद में दुनिया की बातें करना

(70)वजू करते वक्त दुनिया की बातें करना उस वक़्त दुआएं पढ़े या ख़ामोश रहे

(71) बिला वजह शरई किसी के तोहफा हदिया नजराना को रद्द कर देना

(72)रोटी को खवार रखना कि उससे बेअदबी हो और पैरों में आए

(73)वजू की जगह पर पेशाब करना या पेशाब की जगह पर वजू करना

(74)मिट्टी या चीनी के शिकस्ता टूटे हुए बर्तन इस्तेमाल में रखना

और उससे पानी पीना
(75)दरवाजे पर बैठकर खाना पीना यह खिलाफ आदत भी और काबिले नफरत भी
(76)उस्ताद की अजमत व तौकीर में कमी करना कि माज़ अल्लाह उसकी तोहीन
(77)शिकसता या कोहदार कलम से लिखना
(78)कलम का तराशा इधर-उधर डाली देना पैरों में आए
(79)मेहमान को हिकारत से देखना और उसके आने से ना खुश होना
(80)बैतूल खला में बातें करना या वहां किसी दीनी बात में गौर आे ताम्मुल करना
(81) मर्दों को छोटा इस्तेंजा करते वक्त आम गुज़र गाहों पर टहलना और बातें करना
(82)बगैर बुलाए दावत में जाना
(83)चारपाई पर दस्तरखान वगैरह रखे बगैर खाना खाना
(84)चारपाई पर खुद सरहाने बैठना और खाना पायतीं रखना
(85) दांतों से रोटी करना
(86) दांतों को बिला वजह  कपड़े से मलना जैसे मिस्वाक करते हैं
(87) जुल्म करना किसी को ना हक ईजा देना अगरचे जानवर को
(88)गुनाह के कामों में जिद करना और अपनी बात पर अड़ जाना
(89)जिस बर्तन में खाना खाया है उसी में हाथ धोना
(90)कुरान शरीफ घर में मौजूद होते हुए ना पढ़ना
(91)मां-बाप मुर्शिद की मर्जी के खिलाफ काम करना
(92) सब्ज़ दरख़्त काटकर उसकी लकड़ी फरोख्त करना
(93)दरवाजे की दहलीज पर तकिया लगाना या सर रखकर सोना
(94) बिला जरूरत जानवर ज़िबह करना का पेशा बना लेना
(95) सही रिश्ता मिलने के बावजूद जवान लड़कियों को ना बिहाना
( सुन्नी बहिश्ती ज़ेवर)

अगर आदमी इन सब बातों पर मुलव्विस है इन सब बातों को करता है तो इनके करने से गरीबी आती है मुफलिसी आती है 


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